इन पहाड़ियों से गूंजती हैं आवाजें, टीपू सुल्तान यहीं से देता था अपराधियों को सजा
नंदी हिल
अगर आप दक्षिण भारत का भ्रमण करने को सोच रहे हैं तो आपको बेंगलुरु से शुरुआत करें| बेंगलुरु का मौसम बहुत अच्छा होता है| बेंगलुरु के पास ऐसी बहुत जगह है जो प्रयटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है| पास में ही नंदी हिल, जहां पर जाने का एक अलग अनुभव है|
नंदी हिल्स में आप एक साथ पहाड़, नदी और सरोवर की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं| अगर आप हवाओं से बात करना चाहते हैं तो आप यहाँ आ सकते हैं| यहाँ का माहौल शांतिपूर्ण है| 600 मीटर की ऊंचाई पर एक चट्टान है जिसे “टीपू ड्रॉप” के नाम से जाना जाता है| टीपू सुल्तान अपराधियों को सजा देने के लिए इसी चट्टान से उठाकर फेक देता था| बेंगलुरु के लोगों के अनुसार, यहां से फेके गए लोगो की आवाजें आज भी सुनाई देती है|
सनराइज
भारत में ऐसी बहुत सारी जगहें ऐसी हैं| जहां आप सनराइज और सनसेट देखा जा सकता है| लेकिन नंदी हिल्स का सनराइज बिलकुल ही अलग है| सनराइज देखने के लिए आपको 4 बजे तक नंदी हिल्स पहुंचना बहुत जरुरी है| क्योंकि यहाँ पर पहले टिकट लेने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है| कभी कभी भीड़ इतनी ज्यादा होती है, कि सनराइज मिस हो जाती है| लेकिन एकबार टिकट लेने के बाद आप शाम तक घूम सकते हैं|
नंदी हिल्स कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में है| यहाँ की पहाड़ी में चोल वंश की स्पष्ट झलक देखा जा सकता है|
नंदी हिल्स के इतिहास के अनुसार टीपू सुल्तान यहाँ एक किला बनवाया था जो अब नंदीदुर्ग के नाम से जाना जाता है| भारत की आजादी के लड़ाई के बाद यहाँ सिर्फ अवशेष ही बचा हुआ है| थोड़े दूर पर टीपू सुल्तान का जन्म स्थल देवनहल्ली किला है|
कब आएं नंदी हिल्स
बेंगलुरु से नंदी हिल लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है| यहाँ पर आप अक्टूबर से जून तक जा सकते हैं| मानसून के मौसम में जाना जोखिमभरा हो सकता है|
कैसे पहुंचे
यहाँ पर आसानी से रेलमार्ग, वायु मार्ग और सड़क मार्ग से जाया जा सकता है|
रेल मार्ग: सबसे नजदीकी स्टेशन चिक्काबल्लापुर है| यहाँ से नंदी हिल की दुरी मात्र 10 किलोमीटर है|
सड़क मार्ग: आप बेंगलुरु से सीधा कार या बस से नंदी हिल पहुंच सकते हैं|
हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट बेंगलुरु है| यहाँ से आप बस या टैक्सी लेकर जा सकते है|



